बोली हमरी पूरबी : नेपाली कविताएँ


















नेपाल के पांच महत्वपूर्ण कवि एक साथ हिंदी में. इन कविताओं का चयन और अनुवाद किया है- नेपाली और हिंदी साहित्य  के बीच सेतु का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे कवि चन्द्र गुरुंग ने. 

नेपाल वैचारिक, राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तन के संक्रमण  से गुजर रहा है. इसकी पहचान ये कविताएँ भी कराती हैं. शिल्प और कथ्य को लेकर इन कविताओं में साहसिक प्रयोग है, ये कविताएँ वतर्मान नेपाल की नब्ज पर हाथ रखती हैं. 
समालोचन की  ख़ास प्रस्तुति . 







भूपिन व्याकुल

बागलुङ, १५ मार्च १९७४
दो कविता संग्रह प्रकाशित

बौद्धिकता, कला और विचार को समान रुप से रखने मे माहिर कवि व्याकुल की कविताएँ कुरीतियों, भ्रष्टाचार, अनैतिकता के विरुद्ध मोर्चा तैयार करती हैं 




एक बदसूरत कविता

अकेली कब तक
सुंदर बनी बैठी रहेगी कविता.

अकेली कब तब
सौन्दर्य की एक तरफा प्रेमिका बनी रहेगी कविता.

आज तुम्हें
बदसूरत बनाने का मन हो रहा है.

सबसे भद्दी राजसत्ता में भी
सबसे सुन्दर दिखाई देती है कविता.

सबसे घिनौने
हिंसा के समुद्र में नहाकर
सबसे साफ निकल आती हो कविता.

आज तुम्हें
बदसूरत बनाने का मन हो रहा है .

आओ प्रिय कवियों
इस बार कविता को
सुंदरता की गुलामी से मुक्त करते हैं
कला के अनन्त बँधन से मुक्त करते हैं
और देखते हैं
कविता की बत्ती बुझने के बाद
और कितना अँधेरा दीखता है दुनियाँ में
और कितना खाली  है खालीपन.

क्या फर्क है
मन्दिर और वेश्यालय की नग्नता में ?
क्या फर्क है
संसद भवन और श्मशानघाट की दुर्गन्ध में ?
क्या फर्क है
न्यायालय और कसाईखाने की क्रूरता में ?
इनकी दीवार के उस पार
सबसे ईमानदार बनकर खडी रहती है कविता.

आओ प्रिय कवियों
आज ही  कविता की मृत्यु की घोषणा करते हैं
और देखते हैं
और कितनी जीवंत दीखती है
कविता की लाश पर जन्मी कविताएँ.

देखते हैं
कविता की मौत पर खुशी से
किस हद तक पागल बनती है बन्दूक
कितनी दूर तक सुनाई देता है सत्ता का अट्टहास
और कितना उदास दिखेगा कला का चेहरा.

सुन्दर कविताएँ लिखने के लिए तो
सुन्दर समय बाकी है ही.
आज क्यों लिखने का मन कर रहा है
समय की आखिरी लहर तक न लिखी गई
सबसे बदसूरत कविता ?

जैसे बन्दूक लिखती है
शहीद की छाती पर  हिँसा की बदसूरत कविता ….

अकेली कब तक
बदसूरत बनी बैठी रहेगी कविता .





हेमन यात्री

मोरङ, २४ सन् १९७८.
पहला कविता संग्रह पहाड मसित यात्रा गर्छ (२०१२) रत्न पुस्तक भण्डार से

संवेदनशील और भावुक कवि के रूप में विख्यात



मेरे आँखों में बहती नारायणी

बिना बताए
समय असंख्य प्रश्नों को छोड़ गया है इस वक्त.

उन दिनों माँ सुनाया करती थी-
बादल मायके जाए तो
उजला-उजला रहता है दिन

क्या पता
कल की तरह आकाश में
बादल की बारात, पश्चिम जाएगी या नहीं ?

कैसे कहूँ 
वर्षा में कानाफूसी करते हुए
पेड़ की शाखोँ पर बैठे परिंदे
कल फिर, मुलाकात करते हैं या नहीं ?
उधर लडाई को निकले प्रियजन
सकुशल लौटेंगे या नहीं ?

कैसे कहूँ
अपनी ही आँखों के आँगन से गुजरा चाँद
इन्हीं आँखों में, फिर आएगा या नहीं.

बेखबर झूलाते हुए मन के बाग़
इस तरह क्यों दिल्लगी करती है आँधी ?
बोलो भगवान !
किनारों से बहना छोड नारायणी
क्यों मेरे आँखों में उमड़ती है ऐसे

कैसे जवाब ढूँढू मैं इस वक्त
अनुत्तरित हैं प्रश्न खुद ही.
बल्कि बताओ
ऐसे मेरी आँखों से कब तक बहती रहोगी नारायणी ?

गाँव  में मेरे सिसकियों का इन्तजार करते होंगे
उदास राहों के चौपाल,
वर्षा की छुट्टियों का गृहकार्य खत्म कर इंतजार करते होंगे
स्कूल के बच्चे.

यदि
मेरी आँखों मे ऐसे ही बहती रहे नारायणी !
उन का इंतजार और खुशियाँ
यहीँ, आँखों में डूब जाएँगी .




उमेश राई अकिञ्चन


अनुभूति और संवेदना के बीच से निकला हुआ  संवाद ही उमेश राई अकिञ्चनकी कविताएं हैं. उमेश राई अकिञ्चनआधुनिक नेपाली गद्य कविता की परम्परा के  अनुरुप ही कविताएँ लिखते हैं परन्तु उनकी कविताओं में प्रयुक्त हुए बिम्ब, प्रतीक  और अलंकार  उनके  अपने  हैं.




इस वक्त का आखिरी साक्षात्कार

फिर से पहुँचना है मुझे
न पहुँच सके गंतव्य तक

मत पूछो मुझसे
कितनी लम्बी है
प्रधानमन्त्री की मूँछ
या
अभी अभी पेट्रोल पम्प पर लगी
गाडियों की लाईन .

मत पूछो मुझसे
कितना खतरनाक हो सकता है इंतजार ?

बल्कि पूछो
इस हवा और पानी के लिए
पडे हैँ कितने
पुलिस के डण्डे
अश्रु गैस
और
सोया हूँ कितनी बार
हवालात के ठण्डे फर्श पर .

मत कहो मुझसे
तुम्हारी छोटी आँखों में
नहीं जँचता
इस
कुर्सी का सपना .

मैं
रोप–वे के पैरों से
चढना चाहता हूँ
ऊंचे, बहुत ऊंचे
पहाड जैसा नाम .

भादों की धूप
और
बेरोजगार होने की पीडा से
उसी तरह जलते रहते
कभी कभी यूँ लगता है
मानो
धन सम्पत्ति विहीन प्रेमी
और
देश विहीन शरणार्थी
दोनों
हूँ
मैं.

जहाँ तहाँ
बज रहा है इस वक्त
संघीय शासनप्रणाली का संगीत
और
गणतन्त्रका गीत.

आखिरी बार
फिर से
मत पूछो
गणतन्त्र बेहतर है
या राजतन्त्र ?

अभी-अभी ऑफ–लाइन हुई
प्रेमिका
और
देश के नाम सम्बोधन कर चुके
राष्ट्रपति के चेहरे
उतने ही
प्यारे लगते हैँ मुझे .





श्रवण मुकारुङ


भोजपुर, ११ जून १९६८
देश खोज्दै (१९९२), ‘जीवनको लय (२००३) और बिसे नगर्चीको बयान (२०१०) कविता संग्रह प्रकाशित 

देश, समाज और सरकार प्रति असंतोष उनकी कविताओं मे स्पष्ट दिखाई देता है.  



प्रोफेसर शर्मा के लिए

प्रोफेसर शर्मा के चश्मे का शीशा चटक गया है
प्रोफेसर शर्मा के चप्पल के अन्दर पैर पके कुम्हडा जैसे हैं
प्रोफेसर शर्मा की कमीज से बटन लगभग गिर चुके हैं
ब्लेकबोर्ड पर
प्रोफेसर शर्मा के हाथ थरथर कांपते हैं
प्रोफेसर शर्मा को दमे का रोग है .

सर के साथ
हम इस तरह गप्प हाँकते थे
कैंटीन में
ग्राउण्ड में
रेस्ट्रराँ में
या किसी अलसाए सभा समारोह की पिछली सीटों पर.

शहर के लाल पीले अखबार
उदासीन ज्यापू * के आलू के दाम पर घूर रहे हैं
पजेरो, आचार संहिता और निर्वाचन आयोग पर क्रुद्ध है
पानी,बिजली, बकरे के माँस और रसोई गैस के मूल्यादि पर

स्वयं सत्ताभोगियों की तरह ही गिडगिडा रहे हैं – हिनहिना रहे हैं
अफ़सोस
कहीं नही है प्रोफेसर शर्मा की असामयिक मृत्यु की खबर !
किस को मालूम है
प्रोफेसर शर्मा को मिसेज शर्मा नें किन कारणों से छोडा ?

मकान बदलते समय
प्रोफेसर शर्मा नें एक ट्रक पुस्तकें क्यों बेचीं ?
जाते वक्त
फुटकर दूकानदार को क्यों बार बार प्रणाम किया ?
प्रोफेसर शर्मा
जिन्होंने मुझे एक कवि बनाया, अच्छा कवि .

आज भी
मैं याद कर रहा हूँ
लगातार याद कर रहा हूँ
कामरेड का गुप्त प्रेमपूर्ण प्रीतिभोज
और
प्रोफेसर शर्मा का दमे का दीर्घरोग .


*नेपाल की राजधानी काठमांडो  में सदियों से रह रहा एक समुदाय जो मुख्यतः खेती का काम करता  है





उपेन्द्र सुब्बा

उपेन्द्र सुब्बा की कविताएँ नेपाली कवितावृत्त में बिल्कुल अलग विषय, शिल्प और शैली के रुप में स्थापित हैं. किराँत (नेपाल के एक आदिवासी समुदाय) जाति के मिथक, संस्कार और  भाषा के प्रयोग से उपेन्द्र की कविताएँ अपनी अलग पहिचान पाती है. नेपाली साहित्य में  ख़ास चेतना  के साथ उठे आन्दोलन सिर्जनशील अराजकके एक अभियंता भी हैं कवि उपेन्द्र सुब्बा. उस आन्दोलन के दौरान लिखी कविताएँ उनके दो कवितासंग्रहओं में आ गई हैं.    


रास्ता


मैं तो अपने ही रास्ते जा रहा था
पता नहीं ! कहाँ से आई, और तुम ने
मेरा रास्ता रोका.

अपरिचिता (?)
मैं तो बात न करने की सोच रहा था
कि, तुम ने पूछा–“यह रास्ता किधर जाता है ?”
और बताना ही पडा
कि–“यह रास्ता मेरे आँगन से होकर दूर दूर तक जाता है.

जब,
तुम गईं
मेरे घर के आँगन नजदीक से होकर गईं
आखिर, मेरे दिलोदिमाग को छू कर गईं .

तब,
एकाएक बेचैनी बढ़ी
बस यूँ ही
दोराहे में इंतजार करने का मन हुआ
कहीं फिर,
हो सकता है घूम फिरकर इसी रास्ते आओगी
(क्योंकि पृथ्वी गोल हैऐसा सोचता रहा)
और, फिर पूछोगी–“यह रास्ता किधर जाता है ?”
कहूँगा –“यह रास्ता मेरे दिल तक आता है .
इस तरह का ख्याल आया.

इस समय,
तम्हारे आँगन तक पहुँचने का रास्ता
मैँ किस से पूछूँ ?
_______________________________________________



Chandra Gurung
5 august,1976
Graduation in Commerce BBS
कविताओं का अंगेजी सहित कई भाषाओँ में अनुवाद. 
First anthology titled उसको मुटुभित्र देशको नक्सा नै थिएन,  2007.
पेंटिंग -विख्यात चित्रकार कुंवर रविन्द्र  .

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  1. जब कविताओं का अनुवाद हमारी अपनी भाषा मे हो जाता है तो पता ही नहीं चलता की कविता का भी कोई देश होता है क्या?.....इन कविताओं से हम खुद को जुड़ा सा पाते हैं फिर....यही शायद अनुवादक की सफलता है..बहुत अच्छी कविताये/अनुवाद...बधाई Chandra Gurung जी को... धन्यवाद समालोचन...

    सुनीता सनाढ्य पाण्डेय

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  2. Dher achhambhit bhaye ko ..Nepali sahitya maa tapayen dher sam hindi ,Bangla ,Maithili auro Bhojhpuri ko shwada haru paine hunchhah .Yani bhartiya kshetriya bhasha ko asar yanha pani Nepali rachna maa dekhyo mun jurayo .Maa Samalochana klai apno hardik abhar pagat garchhu auro apno dher shubhkamnapani samarpit gare ko .I m really delighted to get many beautiful poems in Nepali presented by samalochna .I praise this effort of serving the literature whatever the language are .Really this the Gr8 work of Samalochna and its team members and scholors .Wishing you all the best friends .

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  3. Chandra Gurung dai, you're doing great job to promote native and regional literature. I really appreciate you. You go on going on!

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  4. जबरदस्त भाई ..समालोचान का यह उपहार तो बेजोड़ है | नेपाली समाज में प्रतिरोध के उभरते ऐसे स्वर , जहाँ एक तरफ उस समाज की घुटन और त्रासदी को बयां कर रहे हैं , वही आशा के उन स्वरों को भी , जिनके सहारे हम एक बेहतर समाज का सपना देख सकते हैं | अनुवाद भी बहुत अच्छा है | उन्हें भी हमारी बधाई |

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  5. खुसेन्द्र राई6/12/12, 8:28 am

    कवि भूपिनका केही कविताहरु अनि मनपर्ने कवि भएको कारण श्रवणजीको प्राय सबै कविताहरु पढेको छु तर अरु कविहरु मेरो निम्ति अन्जान रहेछन्. तर उहाँहरु लगायत सबैका कविताहरु उत्कृष्ट लाग्यो.हाम्रा कविताहरु पनि अरु भन्दा कम छैनन् भन्ने हाँक दिन्छन् यी कविताहरुले. हिन्दी अनुवाद सरल अनि सरस छ. चंद्र गुरुङजी प्रयास उच्च कोटिको छ. यहाँलाई मेरो बधाई.

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  6. अनाम6/12/12, 8:45 am

    1. Ek badsurat kabitaa 2. Professor Sharma k liye 3. Raastaa 4. Mere aakhomein bahati Narayani 5. Ish waktkaa aakhiri saakxyaatkaar..........My rating and never mind about it......... I'm not grammatically perfect in Hindi........ Indeed, I liked your translation.... The originality hasn't lost, I guess... I had read some original poems from here earlier......... Thanks a lot....... A thumb of appreciation for you.... Kailash Sherma

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  7. चन्द्र को हार्दिक बधाई। बहुत सहज अनुवाद है। इन कविताओं के बरक्स नेपाल के आँगन तक पहुँचने का रास्ता मिला। प्रोफेसर शर्मा बहुत अच्छी लगी। मेरी आँखों में बहती नारायणी गहरी संवेदना की कविता है। चन्द्र इसी तरह नेपाली और हिंदी साहित्य के बीच सेतु बने रहें। समालोचन की बारीक निगाहें बड़ी दूर तक जाती हैं ....कुशल कारीगर है। आप दोनों का आभार .

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  8. Bhupeen Vyakul6/12/12, 10:34 am

    Thank you so much Chandra Gurung jyu for your beautiful Hindi translation of my poem KURUP KAVITA. My heartfelt thanks to Arun Dev saab and his worthy emazine SAMAALOCHAN for providing space to some Nepali poems. Im grateful to those who have given beautiful comments on my poem.

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  9. Bhupeen Vyakul6/12/12, 10:37 am

    This poem has been translated in English by my poet friend Manu Manjil. I want to share it for english reader.

    The Ugly Verse

    How long should poetry
    stay beautiful alone.

    How long must it be
    beauty's only urn.

    I so wish today that
    I made it ugly too.

    in the ugliest of states
    poetry remains the loveliest
    of all.

    in the filthiest
    of the violent seas
    poetry bathes and comes out the cleanest.
    I really so wish today
    that I rendered it ugly too.

    come on dear poets
    let's free poetry
    from this tyranny of beauty
    let's free it, let's free it
    from the beauty's infinite bondage.
    let's see
    how dark the world will look
    after it's light is put out.
    let's see how empty will the human world's
    emptiness be.

    in what way is a nude temple different
    from a nude brothel?
    how does a parliament smell differently
    from the way a crematorium does?
    what difference really is there
    in the cold blood of a court
    of law and that of a bucher's?
    just outside their walls stands
    poetry
    in the pristine garb of honesty.

    today I so strongly long to
    turn it into a thing ugly.

    come, my dear poets
    let's declare poetry dead today.
    and let's see how much
    more alive will it look
    sitting upon it's own corpse.

    let's see
    how mad
    will the gun go about the end of imagination
    to what distance
    will the tyrant's laughter reach,
    and how creastfallen can art be.

    great times are still to come
    when beautiful verses shall be written.
    for today's shake, I opt to write
    the ugliest of poetry
    ever written.
    and exactly the way the guns writes
    the poetry of violence
    on the chest of martyrs.

    how long, how long should poetry
    stay beautiful and alone.

    Translated by Manu Manjul

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  10. बहुत अच्छी कवितायेँ हैं सभी लेकिन भूपेन की कविता 'बदसूरत कविता' अपने कथ्य और शिल्प और प्रभाव में बेजोड़ लगी !कविताओं का अनुवाद सहज और सुन्दर है ! पड़ोस में बहती कविता की इस नारायणी में आचमन कराने के लिए समालोचन का आभार !

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  11. Chandra bahut hi sahaj anuvaad hai...kavitaon ke chayan se nepali kavion aur kavitaon ke mood ka pata chalta hai...samaj ki vyakulta jhalakati hai...chayan khas prakar ka hai...padh kar sachmuch achchha laga!

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  12. नेपाली कवितालाई हिन्दी भाषी पाठकमाझ लाने एक सानो प्रयास.

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  13. बहुत ही महत्‍वपूर्ण काम.....सफल अनुवाद.....आभार गुरूंग और अरूण जी।

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  14. sarai ramro anubad chandra ji. badhai 6 hai,

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  15. अनाम6/12/12, 2:37 pm

    क्या प्रयास है चन्द्रजी! हिन्दी साहित्य को आप से इतना सुन्दर तोहफा जो मिला जिसे कम ही लोग कर पाते हैं । मज्जा आयो , रमाइलो लाग्यो । आफ्नो अनुहार अरुको ऐनामा हेर्दा। चन्द्रजी चन्द्रमा हुनुहुन्छ नेपाली साहित्यको आकाशमा । बधाई । Bikash Allay Thapa, Darjeeling

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  16. बहुत अच्छा लगा पढ़ कर . एक, कि चन्द्र की हिन्दी बहुत साफ सुलझी हुई है. दो, कि नेपाल मे नई कविता की गहन गम्भीर पढ़त है. इन मे से कुछ कवियॉं को मूल नेपाली में भी पढ़ चुका हूँ . लेकिन ये कविताएं पहली बार पढ़ीं हैं. और चन्द्र ने पूरी तरह से हिन्दी पाठक के लिए इन्हे सम्प्रेषणीय बनाया है. उपेन्द्र , श्रवण और भूपिन की अन्य कविताएं भी पढ़ना चाहूँगा . ये कविताएं एकदम मेरे मन की हैं . प्रेरक और कहन में असरदार .

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  17. इतने सुंदर चयन और अनुवाद के लिए चंद्र गुरुंग जी को हार्दिक बधाई... सभी कविताएं अपने कथ्‍य और कहन में बेजोड़ हैं... नेपाल के जनमानस को स्‍वर देती हुईं... समालोचन का अतिशय आभार।

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  18. बहुत बडीया...ऒर आभार इतनी अच्छी उपलब्धी के लिए ऒर ऎसे महत्त्वपूर्ण काम के लिए शुभकामना

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  19. किसी भी दूसरी भाषा का साहित्य जब अपनी भाषा में आता है तो निश्चित ही दोनों भाषाओं के मध्य एक सहज सम्बन्ध स्थापित होता है ...दोनों संसंस्कृतियाँ एक दूसरे को बेहतर जान पाती हैं....यदि ये अनुवाद यूँ ही पढने को मिलते रहें तो हम कितनी ही ऐसी चीज़ों को पढ़ पायेंगे जिन्हें पढ़ना कभी संभव नहीं होता .....बेहतरीन कार्य चन्द्र जी ....बहुत शुक्रिया समालोचन ..

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  20. एकदम रमरो हो,गुरुंग धाई.....

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  21. एक अच्छी ट्राँन्सलेसन, किप इट अप चन्द्र जी

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  22. चंद्र आपको बहुत बहुत बधाई.अनुवाद करने में अधिकांशतः भाव पक्ष कमज़ोर हो जाता है पर ,आपके अनुवाद को पढ़ कर ऐसा महसूस नहीं हुआ.कविता की गति में कोई परिवर्तन अनुभव नहीं हुआ.आशा है कि नेपाल की लेखनी से आप समय समय पर हमारा परिचय यूँ ही
    करवाते रहेंगे

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  23. बहुत मजा आया । सुक्रिया, चन्द्र दाइ और अरुण देव जी

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  24. It is an immense pleasure to read five noteworthy Nepali poets here in Samaalochan. Chandra ji deserves a lot thanks for his beautiful translation. Manu Manjil's translation enchanted me equally. Thanks Bhupin ji for providing a chance to read The Ugly Verse.

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  25. शुभपल
    आप सभी मित्रों का हार्दिक आभार । सर्वप्रथम मैं अरुण देव सर को धन्यवाद देना चाहूँगा । अरुण देव सर के सहयोग और प्रेरणा बिना यह काम सम्भव न था । भाषा सम्पादन में जो सहयोग और साथ मिला, अविस्मरणीय है ।
    समालोचन ब्लोग और फेसबुक में ईन अनूदित कविताओं को जो प्यार और सम्मान आप सब से मिला यह जरुर मुझे आगे भी इसी तरह नेपाली कविताओं के अनुवाद के लिए प्रेरित करते रहेंगे ।
    शुक्रिया ।
    चन्द्र गुरुङ

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  26. dhanraj giri9/12/12, 11:43 am

    very much pleased to read all my familair poets simulteneously, dearest Chandra Gurung's HINDI translation is really appreciable.i can not express the magnitude of my happiness in words. in my own style this much i can say: MOGYAMBO KHUS HUWA. ARUN DEV g, thank u a lot.

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  27. Great job Chandra Gurung dai...! I salute you for this lovely work.

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  28. अदभुत नेपाली कवितायें और अनुवाद उससे भी अच्छा इन कवितायों में वहां का जीवन और बिम्ब साफ साफ
    दिखाई देता है नेपाल में जो राज्नीतिक परिवर्तन हो रहा है उनकी गूंज कविताओं में
    सुनाई पड रही हैं
    स्वप्निल श्रीवास्तव
    फैज़ाबाद

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  29. chandra gurung, hindi aur nepali kavita ke kshetr men bahut hee sraahneey kaam kar rahee hain ,behtareen kavitaaon ko prastut kiaa hai , thanks gurung ,

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  30. पढ़ कर बहुत खुशी मिली, संतोष हुआ। जैसा कि एक बेहतर, व्‍यग्र और सचेत पड़ोस देखकर हो सकता है।

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  31. बहुत अच्छी लगी । इस सुकार्यकेा जारी रख्खा जाये ।

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  32. लाज़बाब ! चन्द्र जी के साथ साथ सभी कबिको बधाई । इस तारह हम सारी दुनियाँ पढ सकते हैं ।

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  33. शारिका श्री24/3/14, 11:09 pm

    Wah, what a passion ! We salute your spirit, and the brightness in your translation, Chandra Sir. God Bless You !

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  34. Chandra Gurung is a proficient poet. I did not know he is such a proficient translator also. I knew, his English was good. His Hindi is also so lucid and beautiful. Congratulations Chandra ji, and congratulations to all my Nepali poets and thank you very much to Samlochan for the coverage of Nepali poems.

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  35. Thanks for publishing Nepali poetry in Hindi . poems are images of our time

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