परख : लव इन दि टाइम ऑफ कोलेरा’ : सरिता शर्मा

Posted by arun dev on अप्रैल 19, 2014



























मार्केज     को         याद करते हुए                      

स्त्री पुरुष के बीच के तरह-तरह के प्रेम सम्बन्धों की उदात्तता का आख्यान रचने वाले महान कथाकार गैबरिएल गार्सिया मार्केज  के इस उपन्यास पर एक दिलचस्प फ़िल्म भी बनी है.  इस उपन्यास पर सरिता शर्मा की समीक्षा.
Love     in       the    Time      Of        Cholera 
GABRIEL GARCIA MARQUEZ
मृत्यु नहीं प्रेम शाश्वत है
सरिता शर्मा


नोबेल पुरस्कार से सम्मानित दुनिया के जीवित महानतम लेखकों में शुमार लातिनी अमेरिकी लेखक गेब्रियल गार्सिया मार्केज अपने प्रशासकों के बीच ‘जीवित किंवदंती’ का दर्जा रखते हैं. कोलंबिया निवासी मार्केज़  ने स्पेनिश में लिखा मगर अनुवाद के जरिये उनकी जादुई यथार्थवादी रचनाएँ अंग्रेजी सहित दुनिया की लगभग सभी भाषाओँ के पाठकों तक पहुंची हैं. गेब्रियल गार्सिया मार्केज का उपन्यास ‘लव इन दि टाइम ऑफ कोलेरा’ का विदेशी भाषाओँ में अनुवाद किया गया है और इस पर चर्चित फिल्म बन चुकी है. इसमें स्त्री-पुरुष के बीच प्रेम की नयी और एपिक संभावनाओं को तलाश करने की कोशिश की गयी है. इसे अविस्मरणीय पात्रों के माध्यम से अनूठी किस्सागोई और कलात्मक और काल्पनिक लेखन की शैली ‘जादुई यथार्थवाद’ का प्रयोग करके लिखा है. इसमें असली किरदारों की कहानी में जादुई तत्व मिला दिए गए हैं और काल्पनिक घटनाक्रम का चित्रण वास्तविक लगता है. मार्केज को बिल क्लिंटन ने ‘किसी भी भाषा का सर्वश्रेष्ठ लेखक’ बताया है और ल्योसा के अनुसार ‘पहले से चली आ रही भाषा मार्केज के संस्पर्श से जादुई हो जाती है.
    
लव इन दि टाइम ऑफ कोलेरा नायक तार ओपरेटर फ्लोरेंतिनो एरीजा और कुलीन नायिका फरमीना डाजा के उत्कट प्रेम की गाथा है जो बढ़ती उम्र और विपथनों के बावजूद बना रहता है. फरमीना डाजा के पिता उन्हें अलग कर देते हैं. फरमीनो आर्थिक सुरक्षा और समाज में अपनी हैसियत सुधारने के लिए डॉक्टर अर्बिनो से शादी कर लेती है. डॉक्टर अर्बिनो हैजा के उन्मूलन में जुटा हुआ है. किताब की शुरुआत में अर्बिनो अपने फोटोग्राफर दोस्त द्वारा आत्महत्या कर लेने पर अपनी मौत के बारे में भी सोचने लगता है. कुछ देर बाद ही डॉक्टर अपने तोते को आम के पेड़ से उतारने की कोशिश में स्टूल से गिर जाता है और उसकी भी मृत्यु हो जाती है. फरमीना डाजा से बिछुड़े हुए 53 साल बीत जाने के बाद फ्लोरेंतिनो उसे पाने में सफल हो जाता है. अंत में दोनों प्रेमी नदी पर अनंत यात्रा पर निकल पड़ते हैं और उपन्यास इसी सन्देश के साथ खत्म होता है कि मौत नहीं बल्कि प्रेम ही शाश्वत है जिसका कोई अंत नहीं होता.
        
‘लव इन दि टाइम ऑफ कोलेरा’ में मृत्यु, विनाश और बुढ़ापे पर बहुत विस्तृत और गहन विचार किया गया है. डॉक्टर अर्बिनो के अनुसार सेंट अमूर द्वारा आत्महत्या करने का कारण बूढ़ा हो जाने का भय है. वह महसूस करता है कि उसकी याददाश्‍त कमजोर होती जा रही है. उपन्यास में हम पात्रों को पहले युवा और जीवंतता से ओतप्रोत देखते हैं जो अंत में वृद्ध और अशक्त हो जाते हैं. फ्लोरेंतिनो गंजापन खत्म करने की कोशिश करता है. फरमीना के बच्चों को इस बात पर ऐतराज है कि उनकी माँ बुढ़ापे में प्रेम सम्बन्ध बनाये. उसका बेटा फ्लोरेंतिनो से कहता है कि दुनिया बूढ़े लोगों से छुटकारा पा ले तो बेहतर होगा क्योंकि तब वे अधिक उन्नति कर सकेंगे. शहर भी तबाह हो रहा है. अर्बिनो सोचता है ’उसका शहर समय के छोर पर बिना बदले हुए खड़ा है जहाँ पिछले चार दशक से धीरे धीरे बुढ़ापा और दलदल बढ़ गया है.’ ऐसा लगता है शहर अंतहीन सिविल युद्ध में मौत की तरफ अग्रसर हो रहा है. लेखक ने रोमांस और मृत्यु की थीम को आपस में मिला कर एक दुर्लभ आख्यान रच दिया है. अंतिम अध्याय में अध्यात्मिक प्लेग का जिक्र भी इसकी पुष्टि करता है. मौत अनेक मार्गों से आती है. हैजा, युद्ध, आत्महत्या और बदला लेने के कारण हुई मौतें दुखद और निरर्थक हैं. मृत लोगों और पशुओं के शव नदी में और उसके किनारे दिखाई देते हैं.          .
   
उपन्यास में मार्केज बार-बार प्रेम की थीम की तरफ लौटते हैं और मानते हैं कि जीवन व्यवस्था या अधिकार की बजाय जुनून से नियंत्रित होता है. प्यार समाज के नियमों का उल्लंघन है मगर समाज के हर वर्ग में लगभग सभी लोग मान्य या अवैध प्रेम संबंधों में लिप्त दिखाए गए हैं. व्यावहारिक डॉक्टर अर्बिनो भी इसके अपवाद नहीं हैं. प्यार जीवन को सरस और सार्थक बनाता है. लेखक हर प्रकार के प्रेम का उत्सव मनाता है और किसी भी स्वरूप के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया नहीं है. उपन्यास में वेश्यालय को ‘प्यार का संग्रहालय’ कहा गया है. फरमीना अपने विवाहित जीवन में खुश नहीं है मगर चाहती है कि उसका पति मर जाये तो जान पायेगी कि वह उससे कितना प्रेम करती थी. वह जिंदगी की नयी शुरुआत के बारे में भी सोचती है. फ्लोरेंतिनी और अर्बिनो के लिए अवैध संबंध ऊब और बढ़ती उम्र को परास्त करने का साधन है. इस उपन्यास में प्रेम के विभिन्न स्वरूपों को समझने की कोशिश की गयी है और उसके आदर्श तथा विकृत दोनों पहलुओं को उभारा गया है. यह प्रेम कहानी एक साथ भव्य, गंभीर और व्यंग्यात्मक है. फ्लोरेंतिनो की ड्रेस और अत्यधिक भावुकता पिछली सदी के रोमांस की याद दिलाती है जो हास्यास्पद हो चुका है. फ्लोरेंतिनो फूल खाकर उलटी कर देता है. कारोबार के पत्रों को भी वह काव्यात्मक बना देता है. इसके विपरीत अर्बिनो और दाजा का दाम्पत्य प्रेम अनेक कमियों के बावजूद सामंजस्य स्थापित कर लेता है. फ्लोरेंतिनो सैंकड़ों औरतों के साथ शारीरिक संबंध स्थापित करता है और उन्हें कई खण्डों में रिकॉर्ड भी करता है. वह पढ़े हुए रोमांसों जैसा जीवन जीना चाहता है. वह फरमीना को इतने प्रेम पत्र लिखता है कि इसमें सिद्धहस्त हो जाता है. फिर वह औरों के लिए भी प्रेम पत्र लिखने लगता है. फ्लोरेंतिनो अनेक सबंधों के बावजूद फरमीना के प्रति वफादार रहता है. पुस्तक के अंत में वृद्ध प्रेमियों का मिलन मार्मिक और रुमानियतरहित है. यह सच्चा प्रेम है जिसमें अथाह शांति और स्वीकार्यता है. ऐसा लगा वे वैवाहिक जीवन के कठिन दौर से निकलकर सीधे प्रेम के ह्रदय में दाखिल हो गए हों.’ वे ‘न्यू फिडेलटी’ नौका पर बैठकर अपनी निजता को बनाये रखने के लिए हैजे के प्रतीक पीले झंडे को लगाकर अंतहीन यात्रा पर निकल पड़ते हैं. इस तरह बीमारी और बुढ़ापे के बदले प्रेम को विजयी दिखाया गया है.
       
यह उपन्यास प्यार की बहुविध विडम्बनाओं को सामने लाता है.  कथानक में जगह- जगह मोहभंग की घटनाएँ दर्शाती हैं कि जीवन में प्यार से  जुडी हमारी अपेक्षाएं कभी पूरी नहीं हो पाती हैं. फरमीना अपने से कम हैसियत वाले फ्लोरेंतिनो के प्रेम को स्वीकार करके अपने पिता, कान्वेंट स्कूल, और सामाजिक अपेक्षाओं से विद्रोह करती है. वह उसके रोमांटिक पत्रों, जिनमें वह प्यार के किस्से सुनाता है, से आकर्षित होकर सब कुछ छोड़ देने के लिए तैयार है. मगर वह  खुद ही इस रोमांस में सबसे बड़ी  बाधा बन जाती है. जब वह फ्लोरेंतिनो को अचानक सामने देखती है, तो उसे वह बहुत बदसूरत और साधारण लगा. ‘उसका पूरी तरह मोहभंग हो गया.’ फ्लोरेंतिनो से मोहभंग होने के बाद वह सुदर्शन और कुलीन डा. अर्बिनो से शादी कर लेती है, हालांकि वह बहुत दिलचस्प नहीं  है.
    
उपन्यास में कई दिलचस्प प्रसंग हैं. फ्लोरेंतिनो का मानना ​​है कि उसने वह स्थान खोज लिया है जहां एक सोने और खजाने से भरा स्पेनिश गैलीआन कैरेबियन में कोलंबिया के तट से कुछ दूर के साथ डूब गया था. फ्लोरेंतिनो एक बारह वर्षीय लड़के युक्लिड्स को खजाने की तलाश के लिए गोता लगाने के काम पर लगाता है. लड़का ऐसे दिखाता है मानो उसने जहाज को तलाश कर लिया है और गहनों के टुकड़े लेकर आता है जिन्हें वह जहाज के मलबे से मिले बताता है. फ्लोरेंतिनो एक बहुत बड़ी वित्त योजना शुरू  करने की सोचता है, मगर उसकी माँ बताती है कि गहने नकली हैं  और  लड़के ने फ्लोरेंतिनो को  ठग लिया है. फ्लोरेंतिनो सोच रहा था कि ​​खजाना मिल जाने से वह फरमीना से शादी कर सकेगा.  उपन्यास में इस प्रकार के भोलेपन से आगाह किया गया है. सेंट आमूर की  मृत्यु के पश्चात ही डा. अर्बिनो को उसके अंतिम पत्र से पता चलता है कि उसका  दोस्त इतना चरित्रवान  नहीं था जैसा कि वह उसे समझता था. उसने  शरणार्थी होने का नाटक किया, लेकिन वह हत्या और नरभक्षण अपराध के लिए जेल से बच कर भागा हुआ था. अर्बिनो अपनी पत्नी को बताता है कि उसे इस बात से नफरत है कि उसके दोस्त ने उसे धोखा दिया है, मगर वह खुद भी अपनी पत्नी बेवफाई के साथ बेवफाई करता है. जब फरमीना को बारबरा लिंच के साथ अपने पति के प्रेम संबंध का  पता चलता है तो उसका  मोहभंग हो जाता है. वह सुकून पाने के लिए बचपन के शहर मायके  में पलायन करती है, लेकिन शहर सड़ रहा है जिसे  देख उसका पुनः मोहभंग हो जाता है. वह अतीत की यादों का सहारा भी नहीं ले सकती है. जब वह अपने पति के पास दो साल बाद लौटती है तो उसकी उमंगें खत्म हो चुकी होती हैं और वह झगडालू बुढिया में तब्दील हो जाती है.
   
फ्लोरेंतिनो  फरमीना के प्रति एक अजीब तरह से वफादार रहता है. वह सैकड़ों प्रेम संबंध चलाते हुए भी फरमीना को  सच्चे  प्यार के रूप में याद करते हुए लंबे समय  तक उसका   इंतज़ार करता  है. उसके पति के अंतिम संस्कार के बाद, वह फटाफट उसके पास पहुंचकर  उसे अपने 'शाश्वत प्रेम और अटूट निष्ठा’ की प्रतिज्ञा की याद दिलाता है. आधी सदी तक फरमीना के लिए इंतज़ार करने के बाद फ्लोरेंतिनो को एक रेस्तरां के दर्पण में  उसका प्रतिबिंब दिखाई देता है. वह उसके मालिक से दर्पण खरीद कर अपने साथ घर ले जाता है ताकि उसकी छवि की स्मृति अपने पास रख सके. फ्लोरेंतिनो यह भी पाता है कि उसकी प्रेमिकायें यौन सम्बन्ध ही  नहीं, बल्कि प्यार के मामले में भी उसके प्रति विभिन्न तरीकों से वफादार रहीं थी.  विधवा प्रूडेंशिया का  दरवाजा  हमेशा फ्लोरेंतिनो के लिए खुला है. फ्लोरेंतिनो  की सहायक, लियोना उससे प्रेम करती  है. वह गुमनाम रहते हुए फ्लोरेंतिनो की कंपनी चलाती है और कंपनी की सारी कमाई उसे ही दे देती है. वह उसकी  मदद  से ही कैरेबियन की नदी कंपनी का  सफल कार्यकारी  बन पाता है. अर्बिनो की  मौत के बाद अंततः फ्लोरेंतिनो  फरमीना के साथ मेग्दलेना नदी पर ‘न्यू फिडेलिटी’ नामक नाव पर  यात्रा पर निकल जाता है. यह एक दूसरे के प्रति दुर्लभ समर्पण का प्रतीक है. फ्लोरेंतिनो  अपने चाचा की इस सीख को सार्थक करता है ‘ मनुष्य एक बार उस समय ही पैदा नहीं होते, जब मां उन्हें जन्म देती है, बल्कि जीवन हमेशा नवजीवन सृजित करने के अवसर प्रदान करता रहता है.’  फ्लोरेंतिनो और फरमीना खुद को खुद को प्यार में झोंक कर एक दूसरे में और जीवन में अपना  विश्वास दिखाते हैं, भले ही मृत्यु  दूर नहीं है.    

लव इन दि टाइम ऑफ कोलेरा एक ऐसा उपन्यास है जिसकी गहराई को बहुत जल्दबजी में  महसूस नहीं किया जा सकता है. गेब्रियल गार्सिया मार्केस ने उपन्यास के शरुआती पृष्ठों से हैरानी, गंभीरता और अपरिहार्य उदासी का माहौल बना दिया  है. इस उपन्यास की एक बड़ी खासियत यह है कि इसमें क्षणभंगुर जीवन की भव्यता और प्रेम के स्याह- सफ़ेद पहलुओं पर स्मरणीय पात्रों और घटनाओं के माध्यम से विचार किया गया है.
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सरिता शर्मा
कथाकार, अनुवादक, समीक्षक
sarita12aug@hotmail.com

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